जिंदगी में हम चलते हैं,
कभी रुकते हैं, गिरते हैं, तो कभी संभलते हैं!
पर हर खुशी में तुम्हें ही गले लगाते!
मुश्किलों में तुम्हारे आंचल में आकर कहीं छुप जाते!
क्या अच्छा है, क्या है बुरा,
सब जान तुमसे ही तो पाते!
अपने आशीर्वाद का हाथ सदा सर पर रखना,
दुआ हमेशा मेरी सफलता की करना!
मेरी मां, जब लड़खड़ाए कदम मेरे,
कर देना तुम जिंदगी से दूर सारे अंधेरे!
नई रोशनी दिखाना मुझे,
देखूंगी मैं तुम्हारी आंखों से सवेरे!
बस यही है कहना,
बस इतना ही है कहना,
मां, हमेशा तुम मेरे पास, हमेशा मेरे साथ ही रहना.
-श्रीया कत्याल

मां को समर्पित यह काव्य रचना अच्छी लगी ।
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